| Article Title |
“ढलती सांझ का सूरज” में किसान जीवन की त्रासदी |
| Author(s) | सुशील महतो. |
| Country | India |
| Abstract | इसमें किसानों की त्रासदी की विभिन्न घटनाओं सहित उनकी समस्या और समाधान दिखलाई पड़ता है। एक तरफ समाज और सरकार की नीतियों के कारण किसान वर्ग आज आत्महत्या जैसे जघन्य अपराध करने को मजबूर है। मानो सरकार की यह नीति रह गई हो बाजार आजाद और किसान बर्बाद। वहीं दूसरी तरफ अविनाश के माध्यम से यह देखने को मिलता है कि किस प्रकार पश्चाताप के आग में जलकर अविनाश किसानों की मदद करने को तत्पर है। वह किसानों की समस्या को किसानों के साथ रहकर देखता है और उसे समाधान करने का पूरा प्रयास करता है। वास्तव में यदि हम किसानों की बुनियादी समस्या का समाधान करें तो किसान भी मुख्य धारा में जुड़ सकते हैं साथ ही उसकी आमदनी भी बढ़ सकती है, जो हमें किसानों की नकदी फसल सहित विभिन्न फसल उगने में रुचि एवं उद्यमी महिलाओं द्वारा बनाए गए जैविक खाद की बढ़ती मांग जो महिलाओं की आर्थिक शक्ति को मजबूत करती हो। व्यक्ति यदि किसी चीज को ठान ले तो कोई भी काम असंभव नहीं हो सकता,जो हमें अविनाश के द्वारा विभिन्न गांव में किए हुए काम में दिखलाई पड़ता है। परंतु विडंबना यह भी है कि सरकार की उदासीनता एवं बाजारवाद के कारण किसानों के भीतर सिर्फ और सिर्फ डूबते हुए सूर्य की उदासी छाई रहती है। |
| Area | हिन्दी साहित्य |
| Issue | Volume 2, Issue 4 (October - December 2025) |
| Published | 2025/11/05 |
| How to Cite | महतो, सुशील. (2025). “ढलती सांझ का सूरज” में किसान जीवन की त्रासदी. Shodh Sangam Patrika, 2(4), 17-20. |
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