| Paper Title | प्राचीन भारत में आर्थिक संगठन |
| Author(s) | सत्यम यादव. |
| Country | India |
| Abstract | प्राचीन काल में आर्थिक संगठनों ने एक तरफ आर्थिक उद्देश्यों की पूर्ति की, तो दूसरी ओर व्यक्तिगत श्रेणियों तथा निकायों को सहकारिता की भावना सिखाई। इन संघों के कारण उत्पादन पर नियंत्रण रहा, वस्तुओं का मूल्य भी स्थिर रहे। यद्यपि आर्थिक संघ अपने संगठन तथा कार्य प्रणाली में स्वतंत्र थे, तथापि वे राज्य की राजनैतिक सत्ता पर अधिक दबाव डालने में असमर्थ थे। प्राचीन भारत में ऐसा कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं होता है जब आर्थिक संगठनों ने राज्य को चुनौती दी हो। राज्य और समाज की अर्थव्यवस्था में भी आर्थिक श्रेणियाँ सहायता देती थी तथा नये व्यवसायियों को भी यथा सम्भव सहायता देती थी। राज्य अथवा समाज के आर्थिक हितों पर आघात पहुँचाने की सम्भावना पर ही राज्य श्रेणियों के कार्य में हस्तक्षेप करता था अन्यथा राज्य श्रेणियों के स्वायत्त अधिकारों का सम्मान करता था। |
| Subject Area | इतिहास |
| Issue | Volume 2, Issue 4 (October - December 2025) |
| Published | 2025/12/25 |
| How to Cite | सत्यम यादव (2025). प्राचीन भारत में आर्थिक संगठन. Shodh Sangam Patrika, 2(4), 96–102. |
| License |
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