| Article Title |
आचार्य विष्णुकांत शास्त्री की काव्य-चेतना: संस्कृति, संवेदना और सृजनशीलता का समागम |
| Author(s) | डॉ. मनीष कुमार भारती. |
| Country | India |
| Abstract | आचार्य विष्णुकांत शास्त्री की काव्य चेतना में भारतीय संस्कृति, परंपरा, और राष्ट्रीयता का गहरा प्रभाव दृष्टिगोचर होता है । उनकी रचनाओं में भारतीय दर्शन और जीवन मूल्यों का प्रकट होना उनकी गहन वैचारिकता और सांस्कृतिक जुड़ाव को स्पष्ट करता है । उनकी कविताओं में राष्ट्रीयता, सामाजिक समस्याओं, आध्यात्मिकता, और मानवीय मूल्यों का संयोजन मिलता है । आचार्य शास्त्री का काव्य भारतीयता की गहराई में उतरता है और राष्ट्रीय चेतना से ओतप्रोत है । उनकी कविताएं न केवल समाज को प्रेरित करती हैं, बल्कि उनमें चेतना का बीजारोपण भी करती हैं । उनका काव्य किसी भी प्रकार की विदेशी सत्ता और संस्कृति के अधीनता को नकारता है और भारतीयता को गर्व से अपनाने की प्रेरणा देता है । विष्णुकांत शास्त्री के काव्य में आध्यात्मिक चेतना का विशेष स्थान है । उनकी रचनाओं में भारतीय वेदांत दर्शन, उपनिषदों, और भगवद्गीता के विचारों की झलक मिलती है । शास्त्री जी की कविताएं व्यक्ति को आत्मिक शांति और आंतरिक संतुलन की ओर प्रेरित करती हैं । उनका काव्य समाज की नैतिकता और मूल्यबोध पर भी आधारित है । उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों, अंधविश्वासों, और सामाजिक भेदभाव का विरोध किया । उनके काव्य में व्यक्ति को एक सच्चे मानव बनने की प्रेरणा मिलती है । वे समाज में प्रेम, करुणा, और समरसता की भावना का संदेश देते हैं । |
| Area | हिन्दी साहित्य |
| Issue | Volume 2, Issue 4 (October - December 2025) |
| Published | 2025/12/28 |
| How to Cite | भारती, मनीष कुमार. (2025). आचार्य विष्णुकांत शास्त्री की काव्य-चेतना: संस्कृति, संवेदना और सृजनशीलता का समागम. Shodh Sangam Patrika, 2(4), 129-135. |
View / Download PDF File