| Article Title |
फिल्मी शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गीतों में लोकधुनों का प्रभाव |
| Author(s) | डॉ. रेखा कुमारी. |
| Country | India |
| Abstract | वर्तमान काल में चित्रपट संगीत का प्रचलन अत्यंत ही व्यापक ढंग से किया जाता है। आधुनिक समय में सम्पन्न होने वाले प्रत्येक कार्यक्रम, चाहे किसी भी प्रकार का हो, उसमें संगीत के बिना रंगत ही नहीं आती है। यह प्रथा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। प्राचीन काल में भी समाज में संगीत की तीन धाराओं का प्रचलन था, जिन्हें पूर्ण धार्मिक, पूर्ण लौकिक और धार्मिक-लौकिक के नाम से जाना जाता है। धार्मिक संगीत को मार्गी संगीत या सामगान के समतुल्य माना गया है। लौकिक संगीत की तुलना देशी संगीत या गाथा-गान से की गई है। यही देशी संगीत वर्तमान समय में उपशास्त्रीय संगीत के नाम से प्रचलित हुआ। 19वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध तक उपशास्त्रीय संगीत का प्रचलन बहुत ही सुंदर तरीके से समाज में स्वतंत्र रूप से किया जाता था। 19वीं शताब्दी के मध्य में संगीत के एक नए प्रकार का उदय हुआ, जिसे फिल्म संगीत के नाम से जाना जाता है। फिल्म संगीत के प्रारंभिक चरणों में अधिकतर शास्त्रीय गायकों ने उसे आगे बढ़ाने में योगदान दिया, जिसके कारण आज भी पुराने फिल्म संगीत में रागदारी लोकसंगीत की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। |
| Area | संगीत |
| Issue | Volume 3, Issue 1 (January - March 2026) |
| Published | 2026/03/30 |
| How to Cite | कुमारी, रेखा. (2026). फिल्मी शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गीतों में लोकधुनों का प्रभाव. Shodh Sangam Patrika, 3(1), 151-154. |
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