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Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume - 3 Issue - 3 (July - September 2026)
Paper Title

हिन्दी के प्रमुख प्रयोगवादी काव्यों में युद्ध एवं शांति के संदर्भ

Author(s) डॉ. आरती देवराड़ी.
Country India
Abstract

शोध सार- हिंदी साहित्य की प्रयोगवादी काव्य धारा युद्ध और शांति की अवधारणाओं के बहुआयामी स्वरूप का विश्लेषण करती है। हिंदी साहित्य में प्रयोगवाद स्वतंत्रता के बाद उभरने वाली वह काव्यधारा है, जिसमें कवियों ने पारंपरिक भावबोध शिल्प और विषयवस्तु से हटकर आधुनिक मनुष्य की जटिल अनुभूतियों, आंतरिक संघर्षों तथा वैश्विक यथार्थ को अभिव्यक्त किया। युद्ध और शांति इस काव्य धारा में केवल राजनीतिक या ऐतिहासिक घटनाएं न होकर मानव मन के आंतरिक संघर्ष, सामाजिक विघटन और अस्तित्वगत संकट के प्रतीक के रूप में उपस्थित हुई हैं। प्रयोगवादी कवियों हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय, मुक्तिबोध, शमशेर बहादुर सिंह, भवानी प्रसाद मिश्र, धर्मवीर भारती ने युद्ध को बाहरी हिंसा से अधिक मानसिक तनाव, नैतिक पतन और मानवीय मूल्यों के क्षरण के रूप में चित्रित किया है। इनके काव्य में युद्ध आधुनिक सभ्यता की अमानवीय प्रवृतियों, सत्ता संरचनाओं और वैचारिक टकराव का प्रतीक बनकर उभरता है। विशेष रूप मे मुक्तिबोध के काव्य में युद्ध का स्वरूप सामाजिक अन्याय, वर्ग संघर्ष और वैचारिक अराजकता के रूप में दिखाई देता है, जो मनुष्य को निरन्तर आत्म संघर्ष की स्थिति में डाल देता है; दूसरी ओर प्रयोगवादी काव्य में शांति की अवधारणा पारंपरिक आदर्शवाद से अलग हटकर आत्मिक संतुलन,चेतना, जागरूकता और नैतिक जिम्मेदारी से जुड़ी हुई जान पड़ती है। यह शांति बाह्य परिस्थितियों से अधिक मनुष्य के भीतर घटित होने वाली प्रक्रिया है। अज्ञेय के काव्य में शांति की अवधारणा स्वतंत्र चेतना, आत्म अन्वेषण,के माध्यम से अभिव्यक्त होती है, जबकि शमशेर के काव्य में यह संवेदनशीलता, मानवीय करुणा और सौंदर्य बोध के रूप में उपस्थित हैं। इस प्रकार प्रयोगवादी काव्य युद्ध और शांति की अवधारणा को द्वंदात्मक रूप में प्रस्तुत करता है; जहाँ युद्ध विघटन और संकट का बोध कराता है, वहीं शांति संभावित मुक्ति और मानवीय पुनर्निर्माण की आशा जगाती है। यह काव्यधारा आधुनिक वैश्विक परिदृश्य में मनुष्य की भूमिका, जिम्मेदारी और संवेदनहीनता पर गहन प्रश्न उठाती है।

Keywords संघर्ष, हिंसा, भय, विघटन, अमानवीयता, सामाजिक अन्याय, आत्मसंघर्ष, निराशा, आत्मबोध, मानवीय चेतना, करुणा, संवेदना, नैतिक जागरूकता,आत्मसंयम,आंतरिक शांति।
Subject Area हिन्दी साहित्य
Issue Volume 3, Issue 3 (July - September 2026)
Published 2026/07/15
How to Cite आरती देवराड़ी (2026). हिन्दी के प्रमुख प्रयोगवादी काव्यों में युद्ध एवं शांति के संदर्भ. Shodh Sangam Patrika, 3(3), 1–7.

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