द्रष्टा समाजसुधारक : कन्डुकुरी वीरेशलिंगम और महात्मा जोतीराव फुले

Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Paper - Volume - 3 Issue - 1 (January - March 2026)
Article Title

द्रष्टा समाजसुधारक : कन्डुकुरी वीरेशलिंगम और महात्मा जोतीराव फुले

Author(s) डॉ. प्रमोद भगवान पडवल.
Country India
Abstract सारांश परकीय सत्ता की दासता से मुक्ति पाने के लिए आजादी के संग्राम में शामिल नेताओं का जिस तरह से योगदान रहा है उसे जनता कभी भी भूल नहीं सकती I लेकिन हमें यह बिलकुल नहीं भुलना चाहिये की समाज सुधारकों ने भी स्वस्थ समाज निर्माण के लिए अपार मेहनत की है I आजादी के सैनिकों की लड़ाई सीधे विदेशी ताकद के खिलाफ थी इसलिए उनको भरपूर सहानुभूति मिली I किन्तु समाज सुधारकों का संघर्ष अपने ही देश के नागरिकों के साथ था इसलिए उन्हें न सहानुभूति मिली न सहयोग I आज हम आजाद देश के नागरिक है I यानी एक लड़ाई की समाप्ति हो चुकी है I परन्तु स्वराज्य का सुराज्य निर्माण करने का काफी कार्य बाकी है I ऐसे में हम लोगों को समाज सुधारकों के कार्यों का स्मरण कर उनके बतायें रास्ते पर चलना अनिवार्य हो गया है I नयी पीढ़ी को समाज सुधारकों की भूमिका की, दृष्टिकोन की और कार्य पद्धति की जानकारी अवश्य होनी चाहिए I इसी उद्देश से प्रस्तुत लेख में कन्डुकुरी वीरेशलिंगम और महात्मा फुले के कार्यों का परिचय करवाया है I
Area सामाजिक अध्ययन
Issue Volume 2, Issue 4 (October - December 2025)
Published 2025/11/29
How to Cite पडवल, प्रमोद भगवान. (2025). द्रष्टा समाजसुधारक : कन्डुकुरी वीरेशलिंगम और महात्मा जोतीराव फुले. Shodh Sangam Patrika, 2(4), 62-65.

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