| Article Title |
द्रष्टा समाजसुधारक : कन्डुकुरी वीरेशलिंगम और महात्मा जोतीराव फुले |
| Author(s) | डॉ. प्रमोद भगवान पडवल. |
| Country | India |
| Abstract | सारांश परकीय सत्ता की दासता से मुक्ति पाने के लिए आजादी के संग्राम में शामिल नेताओं का जिस तरह से योगदान रहा है उसे जनता कभी भी भूल नहीं सकती I लेकिन हमें यह बिलकुल नहीं भुलना चाहिये की समाज सुधारकों ने भी स्वस्थ समाज निर्माण के लिए अपार मेहनत की है I आजादी के सैनिकों की लड़ाई सीधे विदेशी ताकद के खिलाफ थी इसलिए उनको भरपूर सहानुभूति मिली I किन्तु समाज सुधारकों का संघर्ष अपने ही देश के नागरिकों के साथ था इसलिए उन्हें न सहानुभूति मिली न सहयोग I आज हम आजाद देश के नागरिक है I यानी एक लड़ाई की समाप्ति हो चुकी है I परन्तु स्वराज्य का सुराज्य निर्माण करने का काफी कार्य बाकी है I ऐसे में हम लोगों को समाज सुधारकों के कार्यों का स्मरण कर उनके बतायें रास्ते पर चलना अनिवार्य हो गया है I नयी पीढ़ी को समाज सुधारकों की भूमिका की, दृष्टिकोन की और कार्य पद्धति की जानकारी अवश्य होनी चाहिए I इसी उद्देश से प्रस्तुत लेख में कन्डुकुरी वीरेशलिंगम और महात्मा फुले के कार्यों का परिचय करवाया है I |
| Area | सामाजिक अध्ययन |
| Issue | Volume 2, Issue 4 (October - December 2025) |
| Published | 2025/11/29 |
| How to Cite | पडवल, प्रमोद भगवान. (2025). द्रष्टा समाजसुधारक : कन्डुकुरी वीरेशलिंगम और महात्मा जोतीराव फुले. Shodh Sangam Patrika, 2(4), 62-65. |
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