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Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume 3, Issue 3 (July - September 2026)
Paper Title

‘कजरी‘ का लोक सौन्दर्य

Author(s)डॉ. प्रियंका कुमारी.
CountryIndia
Abstract

‘कजरी‘ एक ऐसी लोक गायन विधा है जिसके श्रवण से मन-मस्तिष्क प्रफुल्लित हो उठता है, तन-मन थिरकने को बाध्य हो जाता है। वर्षा-ऋतु का सर्वाधिक प्रचलित गीत है कजरी। चहूँ ओर हरियाली ही हरियाली देखकर मन-मयूर इन कजरी गीतों के साथ नृत्य कर झूमने को विवष हो उठता है। इन कजरी-गीतों का लोक-साहित्य और उसकी लोक रसयुक्त धुनें अन्तर्मन को भरपूर आनंदित करते हैं। इसके साहित्य में क्षेत्रिय बोलियों का सुन्दर समावेष होता है जो गीतों को कोमलता प्रदान करते हैं तो इसकी धुनों में गीतों में प्रयुक्त बोलियों की सुगंध बसी होती है। इन्हें सुनने के बाद कोई भी आनंदित हुए बिना नहीं रह सकता। वर्षा के आनन्द से अभिभूत साहित्य के साथ नायक-नायिका के श्रृंगार-वर्णन के अतिरिक्त भगवान षंकर की अराधना एवं भक्तिपरक साहित्य भी खूब सुनने को मिलता है। ऐसी कजरियाँ गायन की उपषास्त्रीय और लोक, दोनों षैलियों में पायी जाती हैं। कजरी गायन की परम्परा भारत में अति प्राचीन समय से ही चली आ रही है। सांस्कृतिक दृष्टि से भारत प्राकृतिक सुषमा से परिपूर्ण देष है। जीवन के समस्त उपादानों की भाँति मृदु मधुर गीतों का गान भी यहाँ के लोगों के दैनिक जीवन का प्रमुख अंग है। प्राचीनतम ग्रंथ ऋग्वेद में लोकगीतों का बीज प्राप्त होता है। प्राचीन साहित्य में जिन गाथाओं का उल्लेख है, उन्हें लोक गीतों का प्रतिनिधि कहा जा सकता है। अतः प्राचीनकाल से ही लोकसंगीत की प्रथा भारत में विद्यमान है।

Subject Areaसंगीत
Issue Volume 2, Issue 4 (October - December 2025)
Published2025/12/29
How to Cite प्रियंका कुमारी (2025). ‘कजरी‘ का लोक सौन्दर्य. Shodh Sangam Patrika, 2(4), 82–86.
License
Copyright © 2025 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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