| Article Title |
शांकरवेदान्त में ‘जीवन्मुक्ति’ का संप्रत्यय |
| Author(s) | डॉ० ऋषिका वर्मा. |
| Country | India |
| Abstract | भारतीय दर्शन में (चार्वाक को छोड़कर) परम शुभ एवं परम पुरूषार्थ मोक्ष को माना गया है। भारतीय दार्शनिक मोक्ष से कम किसी मूल्य को जीवन का परम शुभ स्वीकार ही नहीं करते हैं। प्राचीन ऋषियों ने तो तात्त्विक प्रश्नों का विवेचन केवल साधन रूप में ही किया है। दार्शनिक चिंतन का मुख्य लक्ष्य जीवन के दुःखों को दूर करना हैं। जिस प्रकार भिन्न-भिन्न रंग की गायों के दूध का रंग एक ही होता है, उसी प्रकार दार्शनिक आचार्यों के अलग-अलग होते हुए भी उनकी शिक्षाओं का उद्देश्य एक ही हैः जीव को मोक्षदायक ज्ञान प्रदान करना। |
| Area | दर्शनशास्त्र |
| Issue | Volume 2, Issue 4 (October - December 2025) |
| Published | 2025/12/28 |
| How to Cite | वर्मा, डॉ० ऋषिका. (2025). शांकरवेदान्त में ‘जीवन्मुक्ति’ का संप्रत्यय. Shodh Sangam Patrika, 2(4), 123-128. |
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