आचार्य विष्णुकांत शास्त्री की काव्य-चेतना: संस्कृति, संवेदना और सृजनशीलता का समागम

Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Paper - Volume - 3 Issue - 1 (January - March 2026)
Article Title

आचार्य विष्णुकांत शास्त्री की काव्य-चेतना: संस्कृति, संवेदना और सृजनशीलता का समागम

Author(s) डॉ. मनीष कुमार भारती.
Country India
Abstract आचार्य विष्णुकांत शास्त्री की काव्य चेतना में भारतीय संस्कृति, परंपरा, और राष्ट्रीयता का गहरा प्रभाव दृष्टिगोचर होता है । उनकी रचनाओं में भारतीय दर्शन और जीवन मूल्यों का प्रकट होना उनकी गहन वैचारिकता और सांस्कृतिक जुड़ाव को स्पष्ट करता है । उनकी कविताओं में राष्ट्रीयता, सामाजिक समस्याओं, आध्यात्मिकता, और मानवीय मूल्यों का संयोजन मिलता है । आचार्य शास्त्री का काव्य भारतीयता की गहराई में उतरता है और राष्ट्रीय चेतना से ओतप्रोत है । उनकी कविताएं न केवल समाज को प्रेरित करती हैं, बल्कि उनमें चेतना का बीजारोपण भी करती हैं । उनका काव्य किसी भी प्रकार की विदेशी सत्ता और संस्कृति के अधीनता को नकारता है और भारतीयता को गर्व से अपनाने की प्रेरणा देता है । विष्णुकांत शास्त्री के काव्य में आध्यात्मिक चेतना का विशेष स्थान है । उनकी रचनाओं में भारतीय वेदांत दर्शन, उपनिषदों, और भगवद्गीता के विचारों की झलक मिलती है । शास्त्री जी की कविताएं व्यक्ति को आत्मिक शांति और आंतरिक संतुलन की ओर प्रेरित करती हैं । उनका काव्य समाज की नैतिकता और मूल्यबोध पर भी आधारित है । उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों, अंधविश्वासों, और सामाजिक भेदभाव का विरोध किया । उनके काव्य में व्यक्ति को एक सच्चे मानव बनने की प्रेरणा मिलती है । वे समाज में प्रेम, करुणा, और समरसता की भावना का संदेश देते हैं ।
Area हिन्दी साहित्य
Issue Volume 2, Issue 4 (October - December 2025)
Published 2025/12/28
How to Cite भारती, मनीष कुमार. (2025). आचार्य विष्णुकांत शास्त्री की काव्य-चेतना: संस्कृति, संवेदना और सृजनशीलता का समागम. Shodh Sangam Patrika, 2(4), 129-135.

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