गीताश्री की कहानियों में स्त्री अस्मिता, अधिकार और आत्मनिर्णय की चेतना : एक स्त्रीवादी दृष्टिकोण

Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Paper - Volume - 3 Issue - 2 (April - June 2026)
Article Title

गीताश्री की कहानियों में स्त्री अस्मिता, अधिकार और आत्मनिर्णय की चेतना : एक स्त्रीवादी दृष्टिकोण

Author(s) डॉ. नीता त्रिवेदी, शक्ति वर्धन आर्टिस्ट.
Country India
Abstract यह शोध-पत्र समकालीन हिंदी कथा-साहित्य की प्रमुख लेखिका गीताश्री की कहानियों में उपस्थित स्त्री अस्मिता, अधिकार और आत्मनिर्णय की चेतना का स्त्रीवादी दृष्टिकोण से विश्लेषण करता है। भारतीय समाज की पारंपरिक पितृसत्तात्मक संरचना ने स्त्री को सदैव एक सीमित भूमिका में बाँधने का प्रयास किया है जहाँ उसकी देह, उसकी यौनिकता, उसकी इच्छा और उसके निर्णय सभी समाज की स्वीकृति पर निर्भर माने गए हैं। किंतु गीताश्री की कहानियाँ इस संरचना को भीतर से चुनौती देती हैं। यह अध्ययन इस बात पर विशेष बल देता है कि गीताश्री की स्त्रियाँ विद्रोह की पारंपरिक छवि को त्यागकर एक आंतरिक, सूक्ष्म और गहरे स्तर पर प्रतिरोध रचती हैं। यह प्रक्रिया केवल साहित्यिक कल्पना नहीं बल्कि स्त्री अनुभव की सामाजिक, वैचारिक और संवेदनात्मक यथार्थता को प्रतिबिंबित करती है।
Area हिन्दी साहित्य
Issue Volume 3, Issue 1 (January - March 2026)
Published 2026/03/28
How to Cite त्रिवेदी, नीता, एवं आर्टिस्ट, शक्ति वर्धन. (2026). गीताश्री की कहानियों में स्त्री अस्मिता, अधिकार और आत्मनिर्णय की चेतना : एक स्त्रीवादी दृष्टिकोण. Shodh Sangam Patrika, 3(1), 109-114.

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