| Article Title |
जनपद प्रयागराज (उ0प्र0) में सिंचाई साधनों की स्थितिः प्रतिदर्श चयनित ग्रामों के आधार पर एक विश्लेषण |
| Author(s) | डॉ. रमा शंकर, डॉ. सुरेंद्र कुमार. |
| Country | India |
| Abstract | मानव समाज की समस्त आर्थिक क्रिया किसी न किसी रूप में जल आपूर्ति की अपेक्षा करती है, लेकिन कृषि के सन्दर्भ में इसका विशेष महत्व है, क्योंकि कृषि कार्य पूर्णतः जल आपूर्ति पर ही निर्भर करता है। कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में फसलों के विकास के लिए सिंचाई अत्यंन्त महत्वपूर्ण है। सिंचाई हेतु जल का उपयोग कैसे हो कितना हो और कहाँ हो आदि भौगोलिक संरचना एवं दशाओं पर आधारित होता हैं। धरातलीय एवं भूमिगत जल स्रोतों से प्राप्त जल को कृत्रिम विधियों द्वारा खेतों में प्रावाहित करके फसल उत्पादन हेतु मिट्टी को नम करने की पद्धति को सिंचाई के नाम से जाना जाता है। भारत का 92 प्रतिशत उपयोग योग्य जल कृषि में खपत हो जाता है, अधिकतर भाग सिंचाई में प्रयुक्त किया जाता है। वर्तमान बढ़ती जनसंख्या के कुशल भरण पोषण के लिए पर्याप्त खाद्यान की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर विश्व तापमान में वृद्धि तथा मानसून की अनिश्चितता के फलस्वरूप कृषि उत्पादन में सिंचाई की जरूरत कहीं अधिक बढ़ जाती है, वर्षा जल आधारित कृषि क्षेत्रों में कमजोर मानसून के दौरान सूखे की स्थिति हो जाती है जिससे फसल का कम उत्पादन होता है या फिर फसल नष्ट हो जाती है। सिंचाई के साधनों की उपयोगिता कृषकों के सामाजिक-आर्थिक एवं तकनीकी स्तर पर निर्भर करती है, साथ ही क्षेत्र विशेष के सामाजिक व आर्थिक विकास की संभावनाएँ जल से ही निर्धारित होती है। अतः विपुल उत्पादन हेतु आधुनिक तकनिकों द्वारा सिंचाई, कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण घटक है। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य जनपद प्रयागराज में वर्गवार सिंचाई साधनों की स्थिति का प्रतिदर्श चयनित ग्रामो के आधार पर विश्लेषण करना है। संकेत शब्दः सिंचाई साधनों की स्थिति, प्रतिदर्श चयनित परिवारों का सामाजिक वर्गो के अनुसार विश्लेषण |
| Area | भूगोल |
| Issue | Volume 3, Issue 1 (January - March 2026) |
| Published | 2026/03/30 |
| How to Cite | शंकर, रमा, एवं कुमार, सुरेंद्र. (2026). जनपद प्रयागराज (उ0प्र0) में सिंचाई साधनों की स्थितिः प्रतिदर्श चयनित ग्रामों के आधार पर एक विश्लेषण. Shodh Sangam Patrika, 3(1), 155-162, DOI: https://doi.org/10.70558/SSP.2026.v3.i1.220323. |
| DOI | 10.70558/SSP.2026.v3.i1.220323 |
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