| Paper Title | कर्मठ हिंदी सेवी: श्री बाल शौरी रेड्डी का दक्षिण भारत में हिन्दी के प्रसार और प्रचार में योगदान |
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| Country | India |
| Abstract | शोध सार -दक्षिण में हिंदी प्रचार का बीड़ा महात्मा गांधी ने उठाया था। उनके आह्वान पर जो व्यक्ति उनके साथ जुड़े उनमें बालशौरि रेड्डी का नाम बहुत महत्वपूर्ण है । उन जैसे निष्ठावानऔर समर्पित हिंदी लेखकों की साधना के कारण ही दक्षिण के किसी भी कोने में चले जायें तो राजनीतिक वाद- विवाद के रहते हुए भी, किसी को हिंदी में बात करने में कोई विशेष कठिनाई नहीं होती ।एक उच्च कोटि के कथाकार होने के साथ-साथ उन्होंने साहित्य की अन्य विधाओं में भी अपने प्रतिभा का प्रचुर प्रयोग किया है जिसमें उन्हें पूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। 'चंदामामा' के हिंदी संस्करण के संपादक के रूप में उनकी लोकप्रियता आबाल- वृद्ध ,नर नारियों में रही। एक विशिष्ट हिंदी-सेवी और लेखक के रूप में देश की जनता में उनका जो सर्वत समादर हुआ है, वह भी कम महत्वपूर्ण नहीं। उनकी कृतियां जहां अनेक हिंदी संस्थाओं और प्रतिष्ठानों के द्वारा पुरष्कृत एवं सम्मानित हुई है, वहां देश के कई विश्वविद्यालयों में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर सर्वांगीण शोध और अनुसंधान हो रहा है। |
| Keywords | कर्मठ, हिंदी सेवी, गांधीजी, चंदामामा, मानवता, नैतिकता। |
| Subject Area | हिन्दी साहित्य |
| Issue | Volume 3, Issue 3 (July - September 2026) |
| Published | 2026/09/30 |
| How to Cite | एस. प्रीति, & मनोज कुमार (2026). कर्मठ हिंदी सेवी: श्री बाल शौरी रेड्डी का दक्षिण भारत में हिन्दी के प्रसार और प्रचार में योगदान. Shodh Sangam Patrika, 3(3), 147–152. |
| License |
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