छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति में विद्यमान जैव विविधता संरक्षण की परंपरा

Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Paper - Volume - 3 Issue - 1 (January - March 2026)
Article Title

छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति में विद्यमान जैव विविधता संरक्षण की परंपरा

Author(s) नीलम संजीव एक्का.
Country
Abstract सारांश- जनजातीय संस्कृति द्वारा जैव विविधता संरक्षण वैश्विक पटल पर अनूठा एवं महत्वपूर्ण विषय है,जो पारंपरिक ज्ञान,सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक संसाधनों के सामूहिक प्रबंधन से जुड़ा हुआ है| जनजातीय समुदायों का जीवन न केवल प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से जुड़ा हुआ हैबल्कि यह जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| यह शोधपत्र जनजातीय समुदायों की संस्कृति,उनके पारंपरिक ज्ञान और जैव विविधता के संरक्षण की विधियों पर केन्द्रित है| प्रस्तुत शोधपत्र द्वारा यह भी समझाने का प्रयास किया गया है कि आधुनिक विकास,औद्योगिकीकरण और पर्यावरणीय बदलाव इन समुदायों और उनके पारंपरिक ज्ञान को किस प्रकार प्रभावित कर रहे हैं |
Area समाजशास्त्र
Issue Volume 2, Issue 1 (January - March 2025)
Published 13-02-2025
How to Cite एक्का, नीलम संजीव. (2025). छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति में विद्यमान जैव विविधता संरक्षण की परंपरा. Shodh Sangam Patrika, 2(1), 28-34.

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