शून्य-अपशिष्ट फैशन : एक सतत परिप्रेक्ष्य

Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Paper - Volume - 3 Issue - 1 (January - March 2026)
Article Title

शून्य-अपशिष्ट फैशन : एक सतत परिप्रेक्ष्य

Author(s) डॉ० मलयज गंगवार.
Country India
Abstract वर्तमान समय में फैशन उद्योग न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, बल्कि यह पर्यावरणीय संकटों का भी एक बड़ा स्रोत बन चुका है। वस्त्रों के उत्पादन, रँगाई-छपाई, परिधान-निर्माण और अंततः उनके परित्याग तक की प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में जल, ऊर्जा, रसायन एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों की खपत होती है। जिसके परिणामस्वरूप जल-स्रोतों के प्रदूषण, कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि तथा अपशिष्ट-प्रबंधन की गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। इन पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान हेतु 'शून्य-अपशिष्ट' (Zero-Waste) फैशन की अवधारणा एक सशक्त विकल्प के रूप में उभर रही है। इस पद्धति में ऐसी डिज़ाइन और निर्माण तकनीकों का समावेश होता है, जिनसे वस्त्र का एक भी टुकड़ा व्यर्थ नहीं होता है। प्रस्तुत शोध-पत्र शून्य-अपशिष्ट फैशन की मूल अवधारणा, इसके अंतर्गत उपयोग में लाई जाने वाली तकनीकों, भारत की पारम्परिक शिल्प-कलाओं में इसके अनुप्रयोग, इससे मिलने वाले सामाजिक-आर्थिक एवं पर्यावरणीय लाभ तथा इसे अपनाने में आने वाली प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण करता है। साथ ही, इसमें शून्य-अपशिष्ट फैशन की संभावनाओं को लेकर भविष्य की दिशा को भी रेखांकित किया गया है।
Area सामाजिक अध्ययन
Issue Volume 2, Issue 4 (October - December 2025)
Published 2025/11/05
How to Cite गंगवार, डॉ० मलयज. (2025). शून्य-अपशिष्ट फैशन : एक सतत परिप्रेक्ष्य. Shodh Sangam Patrika, 2(4), 9-16.

PDF View / Download PDF File