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Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume 3, Issue 3 (July - September 2026)
Paper Title

जूठनः आत्मकथात्मक लेखन में दलित अनुभव का दस्तावेज़

Author(s)डॉ.सुरिन्द्र सिंह.
CountryIndia
Abstract

"जूठन" ओमप्रकाश वाल्मीकि द्वारा रचित एक प्रभावशाली दलित आत्मकथा है, जो भारतीय समाज में जातिवाद, अस्पृश्यता और गरीबी के यथार्थ को उजागर करती है। यह कृति दलित समुदाय के संघर्ष, अपमान और आत्म-सम्मान की कहानी है। लेखक ने अपने जीवन के कष्टदायक अनुभवों को साझा करते हुए यह दिखाया कि कैसे दलितों को सवर्ण समाज द्वारा अपमानित किया जाता है और उनका शोषण किया जाता है। पुस्तक में जूठन का प्रतीक जातिवाद और दलितों के प्रति घृणा और असमानता का है, जब बची-खुची रोटियाँ या गंदा भोजन उन्हें दिया जाता था। इस आत्मकथा के पहले खंड में लेखक ने अपनी बचपन की कष्टमय परिस्थितियों का उल्लेख किया है, जहां उन्हें स्कूल में शारीरिक और मानसिक शोषण का सामना करना पड़ा। दूसरे खंड में लेखक ने अपने जीवन के संघर्षों, अस्वस्थता और समाज में दलितों के प्रति मानसिकता को विस्तार से बताया। "जूठन" दलित समाज की पीड़ा और उनकी अनकही कहानियों को सामने लाती है। यह आत्मकथा दलित चेतना को जागृत करने वाली एक महत्वपूर्ण कृति है, जो समाज में बदलाव की आवश्यकता को व्यक्त करती है।

Subject Areaहिन्दी साहित्य
Issue Volume 3, Issue 1 (January - March 2026)
Published2026/03/25
How to Cite डॉ.सुरिन्द्र सिंह (2026). जूठनः आत्मकथात्मक लेखन में दलित अनुभव का दस्तावेज़. Shodh Sangam Patrika, 3(1), 75–81.
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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