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Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume 3, Issue 3 (July - September 2026)
Paper Title

मिथिला के लोकगीतों का अवलोकन

Author(s)प्रवीण कुमार, प्रो. नीरा चौधरी.
CountryIndia
Abstract

हिमालय के पादप्रदेश में कोसी से पश्चिम, गंडक से पूर्व और गंगा से उत्तर विदेह जनपद और राजधानी नगर ‘मिथिला’ आजकल एक सांस्कृतिक जनपद के रूप में अवशिष्ट है। इस भूभाग की प्राकृतिक सुषमा, ऐतिहासिक गौरव एवं सांस्कृतिक अंतर्धारा से समृद्ध है। यहाँ के जीवन में लौकिक एवं वैदिक संस्कृति का समाहार लोकवेद में दृष्टव्य है। ‘लोकगीत’ लोक के गीत हैं, जिन्हें कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरा समाज अपनाता है। मिथिला विश्व के महान सांस्कृतिक धरोहर क्षेत्रों में से एक प्रमुख क्षेत्र है। यहाँ की धरती खाद्यान्न के लिए उर्वरा तो है ही, संतान-गर्भा भी है। इसका सांस्कृतिक, खासकर शैक्षणिक इतिहास हजारों साल का है। इस विद्या-क्षेत्र का गौरव वेदों में वर्णित है। जनक, सीता, याज्ञवल्क्य, कपिल, पक्षधर मिश्र, चण्डेश्वर, गार्गी, मैत्रेयी, लखिमादेई और विद्यापति जैसे संतानों को जन्म देने का गौरव इस धरा को है, जिन्होंने अपनी कृतियों से विश्व को हमेशा-हमेशा के लिए ऋणी बना दिया। विद्यानुरागी यह क्षेत्र सदा से रहा है। विद्वान और सामान्य जनता के बीच जैसा तारतम्य और आपसी समझदारी यहाँ है, शायद ही कहीं मिले। यहाँ के रीति-रिवाज में लोक और शास्त्र का बेजोड़ संगम देखने को मिलता है।

Subject Areaसंगीत
Issue Volume 3, Issue 1 (January - March 2026)
Published2026/03/25
How to Cite प्रवीण कुमार एवं नीरा चौधरी (2026). मिथिला के लोकगीतों का अवलोकन. Shodh Sangam Patrika, 3(1), 94–97.
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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