| Article Title |
महाभारत में युद्ध और शांति की अवधारणाः भारतीय सामरिक चिंतन का दार्शनिक आधार |
| Author(s) | अनुभव सिंह. |
| Country | India |
| Abstract | प्रस्तुत शोध-पत्र में महाभारत में निहित युद्ध और शांति की अवधारणाओं का दार्शनिक तथा सामरिक दृष्टि से विश्लेषण किया गया है। महाभारत को केवल एक ऐतिहासिक या धार्मिक ग्रंथ न मानकर, इसे भारतीय सामरिक चिंतन के आधारभूत स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि महाभारत में युद्ध को “धर्मयुद्ध” के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसका उद्देश्य न्याय की स्थापना और अधर्म का विनाश है। साथ ही, युद्ध को अंतिम विकल्प के रूप में स्वीकार किया गया है, जबकि शांति को सर्वोच्च आदर्श माना गया है। शोध में यह भी बताया गया है कि युद्ध के संचालन हेतु नैतिक नियम निर्धारित थे, जो इसे मर्यादित और मानवीय बनाते थे। श्रीकृष्ण के सामरिक दृष्टिकोण के माध्यम से कूटनीति, नैतिकता और शक्ति के संतुलन को समझाया गया है। पांडवों द्वारा बार-बार शांति प्रयास इस बात को प्रमाणित करते हैं कि संवाद और समझौता भारतीय परंपरा में प्राथमिक साधन रहे हैं। अध्ययन यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि महाभारत में युद्ध और शांति की अवधारणाएं केवल ऐतिहासिक घटनाएं नहीं, बल्कि एक व्यापक दार्शनिक ढांचा हैं, जो आधुनिक वैश्विक संदर्भ में भी प्रासंगिक हैं। यह भारतीय सामरिक चिंतन को नैतिकता और कर्तव्य पर आधारित एक संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करता है। |
| Area | इतिहास |
| Issue | Volume 3, Issue 1 (January - March 2026) |
| Published | 2026/03/30 |
| How to Cite | सिंह, अनुभव. (2026). महाभारत में युद्ध और शांति की अवधारणाः भारतीय सामरिक चिंतन का दार्शनिक आधार. Shodh Sangam Patrika, 3(1), 125-133. |
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