| Article Title |
भारतीय राष्ट्रवाद का उत्थान: सामाजिक एवं आर्थिक कारकों की भूमिका का ऐतिहासिक विश्लेषण |
| Author(s) | डॉ. गौतम कुमार. |
| Country | India |
| Abstract |
भारतीय राष्ट्रवाद का उदय आधुनिक भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रक्रिया थी, जिसका निर्माण केवल राजनीतिक परिस्थितियों का परिणाम नहीं था, बल्कि सामाजिक, आर्थिक, बौद्धिक तथा वैचारिक परिवर्तनों के सम्मिलित प्रभाव से हुआ। औपनिवेशिक शासन के दौरान भारतीय समाज अनेक सामाजिक कुरीतियों, आर्थिक विषमताओं और राजनीतिक दमन से प्रभावित था। ऐसे समय में आधुनिक शिक्षा, सामाजिक सुधार आंदोलनों, प्रेस एवं साहित्य, धार्मिक पुनर्व्याख्या तथा शिक्षित मध्यम वर्ग के उदय ने भारतीय समाज में नई चेतना का संचार किया। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य भारतीय राष्ट्रवाद के उत्थान में सामाजिक एवं आर्थिक कारकों की भूमिका का ऐतिहासिक विश्लेषण करना है तथा यह समझना है कि किस प्रकार इन कारकों ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को वैचारिक और जनाधार प्रदान किया। सामाजिक सुधार आंदोलनों ने जातिगत असमानताओं, महिला उत्पीड़न, बाल विवाह, सती प्रथा तथा अस्पृश्यता जैसी समस्याओं के विरुद्ध संघर्ष करते हुए सामाजिक पुनर्गठन का प्रयास किया। राजा राममोहन राय, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, ज्योतिबा फुले, स्वामी दयानन्द सरस्वती और नारायण गुरु जैसे सुधारकों ने सामाजिक चेतना एवं राष्ट्रीय एकता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दूसरी ओर आर्थिक कारकों में ब्रिटिश औपनिवेशिक शोषण, भूमि-राजस्व नीति, औद्योगिक अविकास, विदेशी पूंजी का वर्चस्व तथा दादाभाई नौरोजी द्वारा प्रतिपादित धन-निकासी सिद्धांत ने भारतीय जनता में आर्थिक असंतोष को बढ़ाया और राष्ट्रवादी चेतना को प्रबल किया। यह अध्ययन ऐतिहासिक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति पर आधारित है, जिसमें पुस्तकों, शोध आलेखों, अभिलेखीय दस्तावेजों तथा द्वितीयक स्रोतों का उपयोग किया गया है। अध्ययन से निष्कर्ष निकलता है कि भारतीय राष्ट्रवाद केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि सामाजिक जागरण और आर्थिक शोषण के विरुद्ध उत्पन्न सामूहिक चेतना का परिणाम था, जिसने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को व्यापक सामाजिक आधार और वैचारिक दिशा प्रदान की। |
| Area | इतिहास |
| Issue | Volume 3, Issue 2 (April - June 2026) |
| Published | 2026/06/10 |
| How to Cite | गौतम कुमार (2026). भारतीय राष्ट्रवाद का उत्थान: सामाजिक एवं आर्थिक कारकों की भूमिका का ऐतिहासिक विश्लेषण. Shodh Sangam Patrika, 3(2), 59–67. |
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