| Paper Title | वैदिक कालीन भारत में शिक्षण पद्धति |
| Author(s) | जैमिनी खानवे. |
| Country | India |
| Abstract | प्राचीन भारतीय इतिहास में शिक्षा का स्वर्णिम इतिहास रहा है। वैदिक काल में शिक्षा की आदर्श व्यवस्था रही है। वैदिक काल की शिक्षण पद्धति में वेद अध्ययन के साथ ही कौशल आधारित शिक्षा पर भी बल दिया गया है। प्राचीन भारतीय शिक्षण संस्थाएँ, शिष्य के स्वभाव, शील व चरित्र पर विशेष ध्यान देती थीं। प्राचीन भारतीय शिक्षा की भाषा संस्कृत थी। इतिहासकारों को मानना है कि यह लगभग 3500 वर्ष पुरानी है। बटु को स्नातक होने की प्रक्रिया के दौरान विभिन्न वेदों के मंत्र, सूक्त को स्मृति-बद्ध कर हविर्भाग करना, बाह्य स्वरूप के साथ अंतःकरण की शुद्धि प्रक्रिया के प्रमुख घटक थे। शिक्षण व्यवस्था आदर्श नियम-पालन व्यवस्था पर आधारित थी। परिणामस्वरूप नैतिक रूप से उत्कृष्ट शिक्षा, ज्ञान-विवेक से परिपूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण करती थी, जो एक सबल-समृद्ध राष्ट्र निर्माण का प्रमुख अवयव बन जाता था। आदर्श समाज की स्थापना के लिए आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण वैदिक कालीन शिक्षा का आधार स्तंभ था। सदाचार और नैतिक मूल्यों पर अधिक बल दिए जाने के कारण वैदिक कालीन शिक्षा प्रभावोत्पादक थी। |
| Subject Area | शिक्षा शास्त्र |
| Issue | Volume 2, Issue 4 (October - December 2025) |
| Published | 2025/12/30 |
| How to Cite | जैमिनी खानवे (2025). वैदिक कालीन भारत में शिक्षण पद्धति. Shodh Sangam Patrika, 2(4), 163–169. |
| License |
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