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Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume 3, Issue 3 (July - September 2026)
Paper Title

हिन्दी-उर्दू विवादः संवाद की भाषा से विवाद की भाषा तक

Author(s)डॉ. मनीष कुमार भारती.
CountryIndia
Abstract

भारत की भाषाई परंपरा का मूल स्वभाव संवाद, सहअस्तित्व और सांस्कृतिक समन्वय में निहित रहा है। यहाँ भाषा कभी केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं रही, बल्कि सामाजिक संबंधों को जोड़ने वाली वह जीवंत शक्ति रही है, जिसके माध्यम से विविध धार्मिक आस्थाएँ, जीवन-मूल्य और सांस्कृतिक अनुभव एक-दूसरे से संवाद करते रहे हैं। उत्तर भारत में सदियों तक प्रचलित वह लोकभाषा—जिसे कभी हिन्दवी, कभी हिन्दुस्तानी और कभी खड़ीबोली कहा गया—जनसामान्य की संवेदना, विचार और व्यवहार की साझा अभिव्यक्ति थी। साधु-संतों की वाणी, सूफी कवियों का प्रेमसंदेश और लोकजीवन की सहज अभिव्यक्तियाँ इसी भाषा के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचीं। इस भाषा ने न किसी धार्मिक सीमा को स्वीकार किया और न किसी सांस्कृतिक दीवार को; उसका स्वरूप स्वाभाविक रूप से समावेशी और संवादधर्मी था। किन्तु इतिहास की विडंबना यह रही कि यही साझा संवाद-भाषा आगे चलकर हिन्दी और उर्दू के रूप में दो पृथक भाषाई पहचानें ग्रहण करने लगी। यह विभाजन भाषिक विकास की स्वाभाविक प्रक्रिया का परिणाम नहीं था, बल्कि औपनिवेशिक हस्तक्षेप और आधुनिक राजनीति की देन था। ब्रिटिश शासन ने प्रशासनिक सुविधा और सत्ता के विस्तार के लिए भाषाओं को वर्गीकृत किया, उन्हें लिपि, शब्दावली और धार्मिक पहचान से जोड़कर अलग-अलग खाँचों में बाँट दिया। परिणामस्वरूप, जो भाषा कभी सांस्कृतिक साझेदारी का माध्यम थी, वही औपनिवेशिक काल में विवाद, विभाजन और राजनीतिक टकराव का कारण बन गई। हिन्दी–उर्दू विवाद वस्तुतः दो भाषाओं के बीच का संघर्ष नहीं, बल्कि सत्ता, पहचान और वर्चस्व की राजनीति से उपजा हुआ संघर्ष है। भाषा यहाँ संप्रेषण का साधन न रहकर सामाजिक अस्मिता और राजनीतिक प्रभुत्व का प्रतीक बन गई। हिन्दी को ‘हिन्दू पहचान’ और उर्दू को ‘मुस्लिम पहचान’ से जोड़ने की प्रवृत्ति ने भाषा को संवाद के धरातल से हटाकर टकराव के मंच पर ला खड़ा किया। इस प्रक्रिया में भाषा की मानवीय और सांस्कृतिक भूमिका पीछे छूट गई और वह विवाद का औज़ार बनकर रह गई।

Subject Areaहिन्दी साहित्य
Issue Volume 3, Issue 1 (January - March 2026)
Published2026/02/11
How to Cite मनीष कुमार भारती (2026). हिन्दी-उर्दू विवादः संवाद की भाषा से विवाद की भाषा तक. Shodh Sangam Patrika, 3(1), 15–24.
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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