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Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume - 3 Issue - 3 (July - September 2026)
Paper Title

दलित आलोचना का स्वरूप और विविध प्रतिमान

Author(s) भगवान साहु.
Country India
Abstract

हिंदी दलित आलोचना हिंदी साहित्य की एक सशक्त धारा है जिसने परंपरागत आलोचनात्मक सौंदर्यबोध और मानदंडों को चुनौती देकर नए साहित्यिक प्रतिमानों का निर्माण किया है। दलित आलोचना के स्वरूप में दलित लेखकों के अनुभव और सामाजिक न्याय की आकांक्षा केंद्र में है। यही कारण है कि आलोचना में जो प्रतिमान उभर कर सामने आए हैं वह समाजपरक और परिवर्तनकारी है। इसकी मुख्य विशेषताओं में दलित केंद्रित परिप्रेक्ष्य और सामाजिक प्रतिबद्धता है। साहित्य में दलित दृष्टि की सार्थकता को समझने के लिए दलित आलोचना के विभिन्न प्रतिमानों की परख आवश्यक है। दलित साहित्य के अपने सौंदर्य बोध है और यह सौंदर्य बोध पारंपरिक प्रतिमानों से भिन्न दलितों की सोच और व्यवहार से जुड़ा हुआ है। दलित आलोचक इसे इतिहास लेखन की वर्चस्वशाली परंपरा मानते हुए इसे चुनौती देते हैं और संपूर्ण परंपराओं और विरासत का पुनर्मूल्यांकन चाहते हैं। इस क्रम में साहित्य में दलित चेतना के बीज और उसके स्वर की पड़ताल वे स्वयं के मानदंडों, प्रतिमानों और सौंदर्य बोध के आधार पर चाहते हैं। दलित आलोचना की इस परिवर्तनकामी आकांक्षा ने एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया है। इससे साहित्य के मूल्यांकन का एक नया सौंदर्य शास्त्र विकसित हुआ है। प्रस्तुत शोध आलेख में दलित आलोचना के स्वरूप एवं उसके विविध प्रतिमानों की गहन एवं गवेषणात्मक पड़ताल प्रस्तुत की गई है।

Subject Area हिन्दी साहित्य
Issue Volume 3, Issue 1 (January - March 2026)
Published 2026/03/07
How to Cite भगवान साहु (2026). दलित आलोचना का स्वरूप और विविध प्रतिमान. Shodh Sangam Patrika, 3(1), 55–61.

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