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Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume 3, Issue 3 (July - September 2026)
Paper Title

भारतीय संस्कृति और साहित्य का अंत: संबंध

Author(s)कृष्णा सरदार, डॉ. जैस्मिन पटनायक.
CountryIndia
Abstract

भारतीय संस्कृति और साहित्य का गहरा और अटूट संबंध है। भारतीय संस्कृति विभिन्न धर्मों, परंपराओं, भाषाओं और कलाओं का समावेश करती है, जबकि साहित्य न केवल संस्कृति का दर्पण है, बल्कि इसे दिशा देने और विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जो समाज की चेतना, विचारधारा और मूल्यों को व्यक्त करता है। भारतीय साहित्य विभिन्न भाषाओं में समृद्ध हुआ है, जैसे हिन्दी, संस्कृत, तमिल, बंगाली आदि जो क्षेत्रीय संस्कृतियों को दर्शाते हैं। संस्कृति मानव समाज की पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसकी एकता, सामरिकता और विविधता को बनाए रखने में मदद करती है। साहित्य संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है जो भाषा के माध्यम से व्यक्ति की भावनाओं, विचारों और अनुभवों को साझा करता है। प्राचीन कल से लेकर आधुनिक युग तक साहित्य ने सांस्कृतिक मूल्यों, सामाजिक परिवर्तनों और दार्शनिक विचारधाराओं को अभिव्यक्त किया है। वेद, उपनिषद, महाकाव्य, भक्ति साहित्य और आधुनिक साहित्य सभी ने समाज को दिशा देने का कार्य किया है। भारतीय साहित्य सदियों से संस्कृति के संवाहक के रूप में कार्य करता आया है, जिसमें धार्मिक, दार्शनिक, ऐतिहासिक और सामाजिक तत्वों की गहरी झलक मिलती है। साहित्य और संस्कृति दोनों एक – दूसरे को प्रभावित और समृद्ध करते है, जिससे भारतीय सभ्यता सतत विकासशील बनी रहती है। बीज शब्द - भारतीय संस्कृति, साहित्य, परंपरा, समाज, सांस्कृतिक मूल्य।

Subject Areaहिन्दी साहित्य
Issue Volume 3, Issue 1 (January - March 2026)
Published2026/03/30
How to Cite कृष्णा सरदार एवं जैस्मिन पटनायक (2026). भारतीय संस्कृति और साहित्य का अंत: संबंध. Shodh Sangam Patrika, 3(1), 146–150.
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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