| Paper Title | हिन्दी सूफी साहित्य में प्रेम के विविध पक्ष |
| Author(s) | डॉ. अमनदीप कौर. |
| Country | India |
| Abstract | हिन्दी सूफी साहित्य में प्रेम को जीवन और साधना का मूल आधार माना गया है। सूफी साहित्य में प्रेम केवल एक भावनात्मक अनुभव नहीं, बल्कि आत्मा की परम सत्य की ओर यात्रा है। यह प्रेम इश्क.ए.मजाजी से आरंभ होकर इश्क.ए.हकीकी के रुप में विकसित होता है। सूफी कवियों जैसे मलिक मुहम्मद जायसी, कुतुबन और मंझन ने प्रेम को आत्मा और परमात्मा के मिलन का माध्यम बताया है। इस साहित्य में विरह की वेदना, मिलन का आनंद, त्याग, समर्पण की साधना और मानवतावादी दृष्टि के माध्यम से प्रेम के विविध रूपों का चित्रण मिलता है। सूफी प्रेम सीमाओं को तोड़कर मानवता, सहिष्णुता और एकता का संदेश देता है। सूफी साहित्य में विरह को विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि विरह की पीड़ा आत्मा को शुद्ध करती है और उसे परमात्मा से मिलन के लिए प्रेरित करती है। वहीं मिलन को आनंद और आत्मिक ऐकता का प्रतीक माना गया है। इस प्रेम में त्याग, समर्पण और अहंकार का विसर्जन आवश्यक है। सूफी प्रेम का स्वरूप् अत्यंत व्यापक और मानवतावादी है, जो जाति, धर्म और सामाजिक भेदभाव को समाप्त कर समस्त समाज को एक सूत्र में बांधता है। इस प्रकार हिन्दी सूफी साहित्य में प्रेम एक साधना, एक दर्शन और एक जीवन मूल्य के रुप में स्थापित होता है, जो मनुष्य को सत्य, शांति और ईश्वर की ओर अग्रसर करता है। |
| Subject Area | हिन्दी साहित्य |
| Issue | Volume 3, Issue 1 (January - March 2026) |
| Published | 2026/03/30 |
| How to Cite | अमनदीप कौर (2026). हिन्दी सूफी साहित्य में प्रेम के विविध पक्ष. Shodh Sangam Patrika, 3(1), 134–139. |
| License |
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