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Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume 3, Issue 3 (July - September 2026)
Paper Title

रेणु के रिपोर्ताज में समाजशास्त्रीय यथार्थ : एक अध्ययन

Author(s)विकास रंजन, डॉ. रोशन रवि.
CountryIndia
Abstract

हिन्दी साहित्य की कथेतर गद्य-विधाओं में रिपोर्ताज एक ऐसी सशक्त साहित्यिक विधा है, जिसमें पत्रकारिता की तथ्यपरकता और साहित्य की संवेदनात्मक अभिव्यक्ति का प्रभावी समन्वय दृष्टिगोचर होता है। यह विधा केवल घटनाओं का विवरण प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उनके सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक आयामों का भी बहुआयामी विश्लेषण करती है। फणीश्वरनाथ 'रेणु' ने हिन्दी रिपोर्ताज को केवल घटनाओं के वृत्तांत के रूप में नहीं, बल्कि जनजीवन की वास्तविक परिस्थितियों, लोक-संस्कृति, सामाजिक विषमता तथा मानवीय संघर्षों की प्रामाणिक अभिव्यक्ति के रूप में विकसित किया। प्रस्तुत शोध-पत्र में रेणु के प्रमुख रिपोर्ताज—ऋणजल धनजल, इस जल प्रलय में तथा नेपाली क्रांति कथा—के आधार पर उनके रिपोर्ताज-साहित्य में निहित समाजशास्त्रीय यथार्थ का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि रेणु ने प्राकृतिक आपदाओं, वर्गीय विषमता, राजनीतिक संघर्ष, लोकतांत्रिक चेतना, लोक-संस्कृति तथा मानवीय संवेदना को किस प्रकार अपने रिपोर्ताजों के माध्यम से व्यापक सामाजिक संदर्भों से जोड़ा है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि रेणु का रिपोर्ताज-लेखन तटस्थ पत्रकारिता का उदाहरण न होकर प्रत्यक्ष जीवनानुभव, सामाजिक सहभागिता तथा जनपक्षधर दृष्टि पर आधारित साहित्यिक अभिव्यक्ति है। उनके रिपोर्ताजों में समाज केवल घटनाओं की पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि संपूर्ण रचना का सक्रिय केंद्र है, जहाँ सामान्य जन का संघर्ष, सामुदायिक जीवन, सांस्कृतिक चेतना तथा लोकतांत्रिक आकांक्षाएँ एक-दूसरे से अंतर्संबद्ध रूप में अभिव्यक्त होती हैं। समकालीन परिप्रेक्ष्य में, जब पर्यावरणीय संकट, विस्थापन, सामाजिक असमानता तथा जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता नई चुनौतियों का सामना कर रही है, तब रेणु का रिपोर्ताज-साहित्य समाजशास्त्रीय अध्ययन, हिन्दी कथेतर गद्य तथा संवेदनात्मक पत्रकारिता—तीनों के लिए समान रूप से अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध होता है।

Keywordsफणीश्वरनाथ 'रेणु', रिपोर्ताज विधा, समाजशास्त्रीय यथार्थ, वर्गीय अंतर्विरोध, लोक-संस्कृति, राजनीतिक चेतना, स्वानुभूत यथार्थ, भाषिक संरचना।
Subject Areaहिन्दी साहित्य
Issue Volume 3, Issue 3 (July - September 2026)
Published2026/09/15
How to Cite विकास रंजन एवं रोशन रवि (2026). रेणु के रिपोर्ताज में समाजशास्त्रीय यथार्थ : एक अध्ययन. Shodh Sangam Patrika, 3(3), 85–91.
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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