| Paper Title | मुस्लिम महिलाओं में शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों की समझ: परंपरागत और आधुनिक शिक्षा के संदर्भ में |
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| Country | India |
| Abstract | मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा का स्वरूप समय के साथ परंपरागत धार्मिक शिक्षण से आगे बढ़कर विद्यालयी, उच्च और व्यावसायिक शिक्षा तक विस्तृत हुआ है। परंपरागत शिक्षा धार्मिक ज्ञान, नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक पहचान और पारिवारिक दायित्वों की समझ विकसित करती है, जबकि आधुनिक शिक्षा सामाजिक, नागरिक, प्रशासनिक और विधिक क्षेत्रों से परिचय कराती है। दोनों शिक्षा-पद्धतियों की उपयोगिता उनकी विषयवस्तु के साथ-साथ शिक्षा की निरंतरता, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक सहयोग और सामाजिक अवसरों से भी प्रभावित होती है। मुस्लिम महिलाएँ भारतीय नागरिक के रूप में समानता, स्वतंत्रता, गरिमा, धार्मिक स्वतंत्रता तथा शिक्षा के अवसरों में समानता सहित विभिन्न संवैधानिक अधिकारों और संरक्षणों की अधिकारी हैं। विवाह, मेहर, भरण-पोषण, विवाह-विच्छेद और बच्चों की अभिरक्षा से संबंधित कानूनी अधिकार भी उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन से सीधे जुड़े हैं। शिक्षा अधिकार-चेतना को सूचना तक पहुँच, तर्क क्षमता, सामाजिक अनुभव और निर्णय क्षमता के माध्यम से प्रभावित करती है। परंपरागत शिक्षा धार्मिक एवं पारिवारिक अधिकार-बोध का आधार प्रदान कर सकती है, जबकि आधुनिक शिक्षा संवैधानिक और नागरिक समझ का विस्तार करती है। व्यापक अधिकार-चेतना के लिए दोनों के उपयोगी पक्षों का समन्वय आवश्यक है, ताकि महिलाएँ अपने अधिकारों को समझकर उन्हें व्यवहारिक जीवन में प्रभावी रूप से उपयोग कर सकें। |
| Keywords | मुस्लिम महिलाएँ, परंपरागत शिक्षा, आधुनिक शिक्षा, संवैधानिक अधिकार, अधिकार-चेतना, सामाजिक परिवर्तन। |
| Subject Area | समाजशास्त्र |
| Issue | Volume 3, Issue 3 (July - September 2026) |
| Published | 2026/09/28 |
| How to Cite | शगुफ्ता परवीन (2026). मुस्लिम महिलाओं में शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों की समझ: परंपरागत और आधुनिक शिक्षा के संदर्भ में. Shodh Sangam Patrika, 3(3), 105–113. |
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