Skip to main content

Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume 3, Issue 4 (October - December 2026)
Paper Title

वैश्वीकरण के दौर में खासी सांस्कृतिक पहचान: परिवर्तन, निरंतरता और पुनर्संरचना की समाजशास्त्रीय अध्ययन

Author(s)
Dr. Chandan Bharadwaj
Assistant Professor, Marwari College, Lalit Narayan Mithila University, Darbhanga, Bihar
CountryIndia
Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र वैश्वीकरण और आधुनिकता के संदर्भ में खासी सांस्कृतिक पहचान में हो रहे सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तनों का समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस विश्लेषण में मुख्य रूप से खासी समाज की मातृवंशीय व्यवस्था, परिवार, नातेदारी, लैंगिक संबंधों, शिक्षा, भाषा, धर्म और युवा-संस्कृति को आधार बनाकर उनमें हो रहे परिवर्तनों को समझने का प्रयास किया गया है। यह अध्ययन पूर्णतः द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है। इसके लिए मातृवंशीय खासी समाज तथा उस पर पड़ रहे वैश्वीकरण के प्रभावों से संबंधित पुस्तकों, शोध-पत्रों, शोध-प्रबंधों तथा सरकारी एवं विश्वस्तरीय संस्थागत प्रकाशनों का अध्ययन किया गया है। इसके लिए उपलब्ध सामग्री को प्रमुख विषयों में विभाजित कर उनका गुणात्मक एवं विषयगत विश्लेषण किया गया है, साथ ही विभिन्न निष्कर्षों की आपस में तुलना भी की गई है। इस प्रक्रिया से यह समझने का प्रयास किया गया है कि खासी समाज के किन क्षेत्रों में परंपरा आज भी सुदृढ़ बनी हुई है और किन क्षेत्रों में आधुनिकता एवं वैश्वीकरण के कारण परिवर्तन हो रहे हैं। प्रस्तुत अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि आधुनिकता एवं वैश्वीकरण के प्रभाव से मातृवंशीय खासी जनजाति की सामाजिक-व्यवस्था, परिवार और लैंगिक संबंधों जैसे मसलों में अवश्य परिवर्तन आए हैं; भाषा, धर्म, जीवन-शैली और सामुदायिक परंपराएँ भी बदल रही हैं; किंतु मातृवंशीय खासी संस्कृति की मूल संरचना अब भी सुरक्षित है। युवा पीढ़ी इस परिवर्तन में विशेष भूमिका निभा रही है — वह बदलते समय के साथ आधुनिक और वैश्विक जीवन-शैली को अपना तो रही है, परंतु साथ ही अपनी स्थानीय पहचान से भी जुड़ी हुई है। यह अध्ययन अकादमिक रूप से यह स्थापित करता है कि आज का मातृवंशीय खासी समाज आधुनिक एवं वैश्विक परिवर्तनों तथा प्रभावों को स्थानीय आवश्यकताओं और सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप निरंतर चुनता और आत्मसात करता है।

Keywordsवैश्वीकरण, खासी जनजाति, सांस्कृतिक पहचान, मातृवंशीयता, परंपरा और आधुनिकता, सामाजिक परिवर्तन, सांस्कृतिक पुनर्निर्माण, युवा संस्कृति
Subject Areaसमाजशास्त्र
Issue Volume 3, Issue 3 (July - September 2026)
Published2026/09/28
How to Cite Bharadwaj, C. (2026). वैश्वीकरण के दौर में खासी सांस्कृतिक पहचान: परिवर्तन, निरंतरता और पुनर्संरचना की समाजशास्त्रीय अध्ययन. Shodh Sangam Patrika, 3(3), 114–124.
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

PDF View / Download PDF File