| Paper Title | महादेवी वर्मा के संस्मरणात्मक रेखाचित्रों में मानवीय संवेदना |
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| Country | India |
| Abstract | महादेवी वर्मा के संस्मरणात्मक रेखाचित्रों में मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति जमीनी धरातल से जुड़ी हुई है। हरेक पात्र को महादेवी वर्मा ने इस तरह बुना है कि उसका समूचा व्यक्तित्व पूरे समाज की भुरभुरी व्यवस्था को उधेड़ रहा हो। उनके पात्रों के जीवन संघर्ष को खोखला और निर्णायक साबित करने में समाज कोई कसर नहीं छोड़ता। स्वामीभक्त रामा, विधवा माँ का एकमात्र पुत्र निडर घीसा, बिबिया, अभागिन बिन्दा, चीनी फेरीवाला, जंग बहादुर और धनसिंह नामक पहाड़ी कुली, भक्तिन (लक्ष्मी), हरिजन जाति की उपेक्षित सबिया, स्नेह से परिपूर्ण अन्धा अलोपी आदि पात्र श्रमनिष्ठा, अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का अद्भुत नमूना प्रस्तुत करते हैं। परंतु जंग खाए हुए जर्जरित समाज में अपने मूल्यों को कायम रखने की जिद्दोजहद में अधिकांशतः: जीवन समाप्ति की और चले गए। महादेवी वर्मा जितनी गहराई से मानव जगत से जुड़ी उतनी ही तल्लीनता से प्राणी जगत की ओर आकर्षित हुई। महादेवी वर्मा की अंतरंग संवेदना का ही परिणाम था कि उनका साहित्य कमजोर वर्ग की थाती बना। सुंदर व सुव्यवस्थित जीवन कैसे नरक में धँस जाता है, महादेवी वर्मा उसकी तह तक पहुँच जाती हैं। उनके शब्द चित्रों की झाँकी सजीव जीवन की यथार्थ अनुभूति को दर्शाने में समर्थ हैं। महादेवी वर्मा की यह आत्मीय मानवीय संवेदना हमें आदर्शवादी सोच का एक विस्तृत नया आयाम प्रदान करती है। |
| Keywords | महादेवी वर्मा, संस्मरणात्मक, रेखाचित्र, मानवीय संवेदना |
| Subject Area | हिन्दी साहित्य |
| Issue | Volume 3, Issue 3 (July - September 2026) |
| Published | 2026/09/30 |
| How to Cite | सुकर्मवती देवी (2026). महादेवी वर्मा के संस्मरणात्मक रेखाचित्रों में मानवीय संवेदना. Shodh Sangam Patrika, 3(3), 125–131. |
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