| Paper Title | संस्कृति की धरोहर के परिप्रेक्ष्य में संगीत के विविध रूप |
| Author(s) | डॉ. रेखा कुमारी. |
| Country | India |
| Abstract | संगीत का संबंध हमारे अतीत काल से चला आ रहा है। प्रारम्भ में ईश्वर की स्तुति करने के लिए गायन किया जाता था। आज इसने जगत में विशेष महत्व प्राप्त कर लिया है। संगीत का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। रामायण, महाभारत इत्यादि काल से ही संगीत का अपना विशिष्ट महत्व रहा है। कृष्ण और गोपिकाओं की रास-लीलाओं का दृश्य अत्यंत मनोरंजक एवं भावपूर्ण है। संगीत का गायन किसी न किसी उद्देश्य को केंद्र में रखकर किया जाता रहा है।अजंता एवं एलोरा की गुफाओं में आज भी संगीत की प्रासंगिकता के प्रमाण दिखाई देते हैं। अमीर खुसरो भक्ति काल के एक समृद्ध व्याख्याता थे। श्लोकों का गायन भी आज समृद्ध परंपरा के रूप में विद्यमान है। भारतीय साहित्य अपनी लोक-संस्कृति एवं परंपराओं के लिए विश्वविख्यात है। साहित्य के आदिकाल, भक्तिकाल तथा आधुनिक काल—तीनों में संगीत ने समाज को गहराई से प्रभावित किया है।भारत में जाति-भेद से ऊपर उठकर संगीत को महत्व दिया गया है। साहित्य इससे समृद्ध हुआ है। यहाँ होली, ईद आदि सभी पर्वों में संगीत को विशेष स्थान प्राप्त है। आज भी संगीत के माध्यम से अनेक मानसिक रोगों को दूर करने का कार्य किया जाता है, जिससे मनुष्य ही नहीं, पशु भी प्रभावित होते हैं। मीराबाई, सूरदास, कबीर, तुलसीदास आदि संत-कवियों ने अपने काव्य एवं संगीत के माध्यम से साहित्य को समृद्ध किया। जिन ग्रंथों ने पूरे जन-मानस को प्रभावित किया है, उनकी प्रासंगिकता भविष्य में भी बनी हुई है, जिससे जन-मानस निरंतर गतिशील बना हुआ है। |
| Subject Area | संगीत |
| Issue | Volume 2, Issue 4 (October - December 2025) |
| Published | 2025/12/29 |
| How to Cite | रेखा कुमारी (2025). संस्कृति की धरोहर के परिप्रेक्ष्य में संगीत के विविध रूप. Shodh Sangam Patrika, 2(4), 87–90. |
| License |
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