| Paper Title |
युवाओं में बढ़ती नशाखोरी की समस्या: कारण और प्रभाव |
| Author(s) | डॉ. राम धनी पाल. |
| Country | India |
| Abstract |
युवा वर्ग किसी भी समाज और राष्ट्र की रचनात्मक ऊर्जा, सामाजिक परिवर्तन और विकास का मुख्य आधार माना जाता है लेकिन वर्तमान समय में युवाओं में बढ़ती नशाखोरी गंभीर सामाजिक समस्या के रूप में सामने आ रही है। प्रस्तुत शोध-पत्र में नशाखोरी को केवल व्यक्तिगत कमजोरी या बुरी आदत न मानकर सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक परिस्थितियों से जुड़ी समस्या के रूप में समझने का प्रयास किया गया है। अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि साथियों का दबाव, गलत संगति, बेरोजगारी, पारिवारिक उपेक्षा, मानसिक तनाव, शहरीकरण, उपभोक्तावादी संस्कृति, सोशल मीडिया और नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता युवाओं को नशे की ओर आकर्षित करती है। नशाखोरी का प्रभाव केवल व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, यह शिक्षा, रोजगार, व्यक्तित्व-विकास, पारिवारिक संबंध, सामाजिक नियंत्रण और सामुदायिक जीवन को भी प्रभावित करता है। इसके कारण पारिवारिक कलह, आर्थिक संकट, शैक्षिक गिरावट, कार्यक्षमता में कमी, अपराध, हिंसा, सामाजिक विघटन और आत्महत्या जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। समाजशास्त्रीय दृष्टि से यह समस्या सामाजिक विचलन, अनोमी, तनाव, भिन्नात्मक सहचर्य और लेबलिंग जैसी प्रक्रियाओं से संबंधित है। अध्ययन में नशाखोरी की रोकथाम के लिए परिवार, शिक्षण संस्थानों, समाज, सरकार, परामर्श सेवाओं, पुनर्वास केंद्रों और जागरूकता कार्यक्रमों की संयुक्त भूमिका को आवश्यक माना गया है। कहा जा सकता है कि नशामुक्त युवा ही स्वस्थ परिवार, सशक्त समाज और प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण का आधार बन सकते हैं। |
| Keywords | नशाखोरी, युवा, सामाजिक विचलन, पारिवारिक विघटन, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक नियंत्रण, पुनर्वास। |
| Subject Area | समाजशास्त्र |
| Issue | Volume 3, Issue 2 (April - June 2026) |
| Published | 2026/06/25 |
| How to Cite | राम धनी पाल (2026). युवाओं में बढ़ती नशाखोरी की समस्या: कारण और प्रभाव. Shodh Sangam Patrika, 3(2), 144–152. |
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