| Paper Title | लाल पसीना उपन्यास में भारतीय गिरमिटियां मज़दूर: संघर्ष से मुक्ति की ओर |
| Author(s) | डॉ. पलाशी बिस्वास. |
| Country | India |
| Abstract | शोधसार पसीना श्रम का प्रतीक है। पसीने के साथ जब लाल युक्त हो जाता है तब उसका अभिप्राय कठोर श्रम से होता है। लाल पसीना उपन्यास अभिमन्यु अनत द्वारा लिखी हुई एक कालजयी महाकाव्यात्मक प्रवासी हिन्दी उपन्यास है। यह उपन्यास मॉरीशस की धरती पर भारतीय गिरमिटियां मज़दूरों के साथ घटनेवाली व्यथा- कथा को बयां करती है। मॉरीशस की कठोर पथरीली भूमि को भारतीय अनुबंधित मज़दूरों ने अपने अथक मेहनत और परिश्रम से तथा उस भूमि की मिट्टी में अपने पसीने की बूंदों को मिलाकर किस तरह से उर्बर बनाया लाल पसीना की कथा उन्हीं घटनाओं पर आधारित है। बंधुआ मज़दूरों पर होने वाली अमानवीय यातनायें और उन यातनाओं को सहते हुये मज़दूरों में उत्पन्न होने वाली प्रतिरोध की भावना को जगाकर सिर्फ शारीरिक गुलामी ही नहीं मानसिक गुलामी से भी उनकी मुक्ति की कामना की गई है। पहली पीढ़ी की मज़दूरों में रघुसिंह है जो जहाज़ में लदकर सोने के लालच में मारिच देश में आता है। इस पीढ़ी के मज़दूर चुपचाप यातनायें सहकर बेगारी करता है। रघुसिंह का बेटा किसन दूसरे पीढ़ी का नवयुवक है जो अपनी गुलामी को देखकर बेचैन है उसकी बेचैनी ही उसके भीतर प्रश्न बनकर उभरती है। सिपाही कुंदन से प्रभावित होकर उसके भीतर सामुदायिक तथा संगठन की भावना जगती है। गुलामी से मुक्ति पाने के लिये किसन आजीवन संघर्ष करता है और अंत में गोरों के हाथों गोली लगने से उसकी मौत हो जाती है। किसन का बेटा मदन तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। इनकी स्तिथि पहले से थोड़ी बेहतर होने पर भी शारीरिक तथा मानसिक यातनायें कम नहीं होती है। वे खेत के मालिकों के षड्यंत्रों तथा प्राकृतिक आपदाओं के कारण पीड़ित होते रहते हैं। मदन भी उनके षड्यंत्रों के कारण अपने आँखों की रौशनी को खो बैठता है। अतः अभिमन्यु अनत ने लाल पसीना में विदेशी धरती पर भारतीय मज़दूरों द्वारा असंख्य अमानवीय यातनायें सहते और शोषण के विरूध्द मुक्ति के लिये संघर्ष करते दिखाया है। |
| Keywords | लाल, पसीना, प्रवासी, गिरमिटिया, मारिच, मॉरीशस, सोना, गन्ना, सर्वहारा, पूंजीपति, शोषण, संगठन, संघर्ष, मुक्ति। |
| Subject Area | हिन्दी साहित्य |
| Issue | Volume 3, Issue 3 (July - September 2026) |
| Published | 2026/09/15 |
| How to Cite | पलाशी बिस्वास (2026). लाल पसीना उपन्यास में भारतीय गिरमिटियां मज़दूर: संघर्ष से मुक्ति की ओर. Shodh Sangam Patrika, 3(3), 69–75. |
| License |
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