| Paper Title | अशोक के अभिलेखों में पर्यावरण चेतना के विविध आयाम |
| Author(s) | ज्योति प्रकाश सरोज. |
| Country | India |
| Abstract | मौर्यकाल भारतीय इतिहास में केवल राजनीतिक एकीकरण का ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय चेतना के विकास का भी एक महत्त्वपूर्ण चरण रहा है। इस काल में प्रकृति, मानव और अन्य जीवों के बीच सामंजस्यपूर्ण सम्बन्ध की अवधारणा स्पष्ट रूप से उभरती है। सम्राट अशोक के अभिलेख इस पर्यावरणीय दृष्टि के सशक्त ऐतिहासिक प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। कलिंग युद्ध के पश्चात् अशोक द्वारा प्रतिपादित धम्म की नीति का मूल आधार अहिंसा, करुणा तथा सभी जीवों के प्रति सह-अस्तित्व की भावना रही है, जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव पर्यावरण संरक्षण पर पड़ा। अशोक के शिलालेखों एवं स्तम्भ लेखों में पशु-हत्या पर नियंत्रण, कुछ जीवों के वध पर प्रतिबन्ध, वृक्षारोपण, औषधीय वनस्पतियों का संरक्षण, मार्गों के किनारे छायादार वृक्षों की व्यवस्था तथा कुओं और जलाशयों के निर्माण जैसे उल्लेख मिलते हैं। ये व्यवस्थाएँ राज्य द्वारा संचालित पर्यावरणीय नीतियों को दर्शाती हैं। वन, जल तथा पशु-पक्षी संरक्षण के माध्यम से अशोक ने न केवल मानव कल्याण, बल्कि समस्त जीव-जगत की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया। निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि अशोक के अभिलेखों में निहित पर्यावरण चेतना प्राचीन भारत की उन्नत पर्यावरणीय सोच को प्रतिबिम्बित करती है, जो आज के वैश्विक पर्यावरण संकट के संदर्भ में भी अत्यन्त प्रासंगिक है। |
| Subject Area | इतिहास |
| Issue | Volume 2, Issue 4 (October - December 2025) |
| Published | 2025/12/29 |
| How to Cite | ज्योति प्रकाश सरोज (2025). अशोक के अभिलेखों में पर्यावरण चेतना के विविध आयाम. Shodh Sangam Patrika, 2(4), 152–156. |
| License |
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