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Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume - 3 Issue - 3 (July - September 2026)
Paper Title

मनीषा कुलश्रेष्ठ के कथा साहित्य में स्त्री अस्मिता और यथार्थबोध : कहानियों और उपन्यासों का तुलनात्मक अध्ययन

Author(s) डॉ. शची सिंह, योगिता वर्धन.
Country India
Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र मनीषा कुलश्रेष्ठ के कथा साहित्य में स्त्री अस्मिता और यथार्थबोध के बहुआयामी स्वरूप का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। समकालीन हिंदी साहित्य में मनीषा कुलश्रेष्ठ एक ऐसी लेखिका के रूप में उभरी हैं जिन्होंने स्त्री को एक विचार, संवेदना और जीवंत सत्ता के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपने कथा साहित्य में स्त्री के अनुभवों को प्रेम, यौनिकता, मातृत्व, अकेलेपन, मानसिक स्वतंत्रता और सामाजिक विसंगतियों जैसे विविध पक्षों के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। यह अध्ययन दर्शाता है कि जहाँ उनकी कहानियाँ प्रतीकात्मकता, संवेदनशीलता और तीव्रता लिए हुए हैं वहीं उनके उपन्यास वैचारिक गहराई, ऐतिहासिक संदर्भ और सांस्कृतिक विमर्श के साथ एक विस्तृत दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। अतः यह शोध-पत्र मनीषा कुलश्रेष्ठ के कथा साहित्य को स्त्री मुक्ति और अस्मिता की खोज के साथ समकालीन समाज की विसंगतियों के एक गंभीर और सूक्ष्म विश्लेषण के रूप में भी रेखांकित करता है।

Subject Area हिन्दी साहित्य
Issue Volume 3, Issue 1 (January - March 2026)
Published 2026/03/28
How to Cite शची सिंह एवं योगिता वर्धन (2026). मनीषा कुलश्रेष्ठ के कथा साहित्य में स्त्री अस्मिता और यथार्थबोध : कहानियों और उपन्यासों का तुलनात्मक अध्ययन. Shodh Sangam Patrika, 3(1), 103–108.

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