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Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume - 3 Issue - 3 (July - September 2026)
Paper Title

संहिता ग्रंथों में रत्न विज्ञान

Author(s) नितेश बौड़ाई.
Country India
Abstract

प्राचीन संहिता ग्रंथों में रत्नों का वर्णन केवल अलंकारिक वस्तु के रूप में नहीं, बल्कि ज्योतिष, आयुर्वेद, धर्म, राजनीति तथा सामाजिक जीवन के महत्वपूर्ण अंग के रूप में प्राप्त होता है। वैदिक साहित्य, बृहत्संहिता, गर्गसंहिता, अग्निपुराण, अर्थशास्त्र तथा रसरत्नसमुच्चय आदि ग्रंथों में रत्नों की उत्पत्ति, स्वरूप, गुण, दोष, परीक्षा तथा उपयोग का विस्तृत विवेचन मिलता है। इन ग्रंथों से स्पष्ट होता है कि प्राचीन भारतीय आचार्यों को रत्नों के भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों पक्षों का गहन ज्ञान था। संहिता ग्रंथों में मुख्यतः नवरत्नों — माणिक्य, मोती, मूंगा, पन्ना, पुष्पराज, हीरा, नीलम, गोमेद तथा वैदूर्य — का वर्णन प्राप्त होता है। प्रत्येक रत्न को किसी न किसी ग्रह से संबंधित माना गया है तथा उनके शुभाशुभ प्रभावों का उल्लेख किया गया है। बृहत्संहिता में रत्नों की शुद्धता, चमक, रंग, कठोरता एवं दोषों की परीक्षा का अत्यंत वैज्ञानिक वर्णन मिलता है।आयुर्वेदिक ग्रंथों में रत्न भस्म के निर्माण तथा उनके चिकित्सीय प्रयोगों का उल्लेख मिलता है। इनका उपयोग मानसिक शांति, रोग निवारण तथा शारीरिक शक्ति-वृद्धि हेतु किया जाता था। इससे ज्ञात होता है कि भारतीय चिकित्सा पद्धति में रत्न विज्ञान का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

Keywords संहिता ज्योतिष, रत्न विज्ञान, नवरत्न, बृहत्संहिता, रत्न परीक्षा, रत्न चिकित्सा
Subject Area ज्योतिष
Issue Volume 3, Issue 2 (April - June 2026)
Published 2026/06/25
How to Cite नितेश बौड़ाई (2026). संहिता ग्रंथों में रत्न विज्ञान. Shodh Sangam Patrika, 3(2), 97–101.

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