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Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume 3, Issue 3 (July - September 2026)
Paper Title

सुभद्रा कुमारी चौहान के कथा-साहित्य में स्त्री-चेतना और सामाजिक यथार्थ

Author(s)शालिनी यादव.
CountryIndia
Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र में सुभद्रा कुमारी चौहान के कथा-साहित्य में सामाजिक और स्त्री-केंद्रित पक्षों का अध्ययन किया गया है। सुभद्रा को प्रायः राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की कवयित्री के रूप में स्मरण किया जाता है, किंतु उनका कथा-साहित्य भी हिन्दी साहित्य में विशिष्ट महत्त्व रखता है। उनकी कहानियों में तत्कालीन भारतीय समाज, पारिवारिक जीवन, स्त्री-अनुभव, आर्थिक अभाव, सामाजिक विषमता और मानवीय संवेदना का यथार्थ चित्रण मिलता है। उनके कथा-साहित्य में स्त्री केवल करुणा या सहानुभूति की पात्र नहीं है, वह आत्मसम्मान, नैतिक साहस और चेतना से सम्पन्न व्यक्तित्व के रूप में सामने आती है। पारिवारिक दबाव, सामाजिक रूढ़ियाँ, जातिगत संकीर्णता, आर्थिक असमानता और पितृसत्तात्मक व्यवस्था स्त्री के जीवन को प्रभावित करती हैं, फिर भी वह अपनी गरिमा और मानवीय मूल्यों को बचाए रखने का प्रयास करती है। सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानियों में दलित, वंचित और ग्रामीण स्त्री का चित्रण भी संवेदनशील दृष्टि से हुआ है। इससे उनका कथा-साहित्य मात्र स्त्री-जीवन की पीड़ा का दस्तावेज नहीं रहता, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और मानवीयता की चेतना को भी व्यक्त करता है। सुभद्रा की कहानियाँ अपने समय के समाज की विसंगतियों को उजागर करते हुए स्त्री-अस्मिता, आत्मसम्मान और सामाजिक यथार्थ को प्रभावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती हैं। उनका कथा-साहित्य हिन्दी कहानी परंपरा में स्त्री-चेतना और सामाजिक सरोकार की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है।

Keywordsस्त्री-चेतना, सामाजिक यथार्थ, नारी अस्मिता, पारिवारिक विसंगति, मानवीय संवेदना।
Subject Areaहिन्दी साहित्य
Issue Volume 3, Issue 2 (April - June 2026)
Published2026/06/30
How to Cite शालिनी यादव (2026). सुभद्रा कुमारी चौहान के कथा-साहित्य में स्त्री-चेतना और सामाजिक यथार्थ. Shodh Sangam Patrika, 3(2), 153–160.
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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