| Paper Title |
अलीपुरद्वार के वनवासी राभा समुदाय की बदलती हुई मानवता एवं व्यवहार में परिवर्तन: एक मानवशास्त्रीय अध्ययन |
| Author(s) | विवेक कुमार भगत, डॉ. मयंक प्रकाश. |
| Country | India |
| Abstract |
राभा उत्तरी पश्चिम बंगाल की एक अल्पज्ञात वनवासी जनजाति है, जो मुख्यतः अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी जिलों के कुछ वन ग्रामों में निवास करती है। वन राभा समुदाय बोडो समूह से संबंधित है तथा उत्तर बंगाल में इन्हें ‘कोच’ के नाम से भी जाना जाता है। वे तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार की ‘कोचक्रो’ बोली बोलते हैं तथा उनकी शारीरिक एवं आकृति विशेषताओं के आधार पर उन्हें मंगोलीय प्रजातीय समूह से संबंधित माना जाता है। राभा समुदाय पूर्णतः वनों पर निर्भर है, इसलिए उनकी अर्थव्यवस्था को वन-आधारित अर्थव्यवस्था कहा जाता है। वे सीमित मात्रा में वन भूमि के भीतर धान की खेती भी करते हैं। परंपरागत रूप से उनका समाज मातृवंशीय रहा है, किंतु विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारणों से वर्तमान में वे मातृवंशीयता और पितृवंशीयता के बीच संक्रमण की स्थिति में हैं। वन बस्तियों में उनका जीवन एवं संस्कृति अत्यंत सरल रही है तथा उनका व्यवहार भी सहज एवं सरल रहा है। किंतु समय के साथ अनेक कारकों के प्रभाव से उनकी मानवता, सामाजिक जीवन एवं व्यवहार में परिवर्तन होने लगा है। यह शोध-पत्र समय के साथ वन राभा समुदाय में आए मानवीय एवं व्यवहारगत परिवर्तनों का अध्ययन करने का प्रयास करता है। यह अध्ययन उन कारकों को भी उजागर करता है जो राभा समुदाय की मानवता एवं व्यवहार में परिवर्तन लाने के लिए उत्तरदायी रहे हैं। इसके अतिरिक्त, यह शोध लेख उन विकासात्मक हस्तक्षेपों पर भी प्रकाश डालता है जिन्होंने वन राभा समुदाय के जीवन में परिवर्तन लाया है। अलीपुरद्वार की वन बस्तियों में कोविड-19 के बाद उत्पन्न मानवीय जीवन की चुनौतियों पर भी इस लेख में चर्चा की गई है। यह शोध-पत्र क्षेत्रीय (फील्ड) अध्ययन एवं गुणात्मक आँकड़ों पर आधारित है। शोध निष्कर्षों की पुष्टि के लिए कुछ केस स्टडी भी सम्मिलित की गई हैं। साथ ही, अध्ययन में द्वितीयक स्रोतों का भी उपयोग किया गया है। |
| Keywords | मानवता, व्यवहार परिवर्तन, वन राभा । |
| Subject Area | नृविज्ञान |
| Issue | Volume 3, Issue 2 (April - June 2026) |
| Published | 2026/06/30 |
| How to Cite | विवेक कुमार भगत एवं मयंक प्रकाश (2026). अलीपुरद्वार के वनवासी राभा समुदाय की बदलती हुई मानवता एवं व्यवहार में परिवर्तन: एक मानवशास्त्रीय अध्ययन. Shodh Sangam Patrika, 3(2), 161–166. |
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