| Article Title |
मृदुला गर्ग के उपन्यास ‘कठगुलाब’ में नारी अस्मिता और आत्मसंघर्ष |
| Author(s) | संदीप कौर. |
| Country | India |
| Abstract |
मेरे शोध-पत्र का मुख्य उद्देश्य मृदुला गर्ग के उपन्यास ‘कठगुलाब’ में नारी संवेदना की अभिव्यक्ति को समझना है। मृदुला गर्ग एक शांत, संकोची तथा अंतर्मुखी स्वभाव की लेखिका हैं। उनका उपन्यास ‘कठगुलाब’ नारी भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने वाली एक सशक्त कृति है, जिसमें स्त्री पर होने वाले अन्याय, अत्याचार और उसकी पीड़ा के साथ-साथ स्त्री-पुरुष संबंधों की जटिलता को अत्यंत संवेदनशील रूप में चित्रित किया गया है। ‘कठगुलाब’ का प्रतीकात्मक अर्थ “नारी की जिजीविषा” है। लेखिका का मानना है कि स्त्रियाँ साधारण गुलाब की तरह नहीं होतीं, जो स्वतः ही खिल उठें, बल्कि वे कठगुलाब की भाँति होती हैं, जिन्हें खिलने के लिए विशेष देखभाल और संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है। |
| Area | हिन्दी साहित्य |
| Issue | Volume 3, Issue 2 (April - June 2026) |
| Published | 2026/05/23 |
| How to Cite | संदीप कौर (2026). मृदुला गर्ग के उपन्यास ‘कठगुलाब’ में नारी अस्मिता और आत्मसंघर्ष. Shodh Sangam Patrika, 3(2), 26–31. |
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