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Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume - 3 Issue - 3 (July - September 2026)
Paper Title

भारत में लिनेन वस्त्रों के प्रति उपभोक्ताओं की जागरूकता, प्राथमिकता एवं खरीद व्यवहार का अध्ययन

Author(s) विवेक शर्मा, प्रो. रक्षा सिंह.
Country India
Abstract

आज जब पूरी दुनिया में पर्यावरण के प्रति सजगता बढ़ रही है, तब प्राकृतिक और टिकाऊ वस्त्रों की माँग भी तेजी से बढ़ रही है। लिनेन - जो सन के पौधे से प्राप्त एक प्राचीन प्राकृतिक रेशा है - अपनी श्वास-क्षमता, टिकाऊपन, और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया के कारण वैश्विक वस्त्र बाजार में एक महत्त्वपूर्ण स्थान बना रहा है। भारत में भी, विशेषतः शहरी उपभोक्ताओं के बीच, लिनेन वस्त्रों के प्रति रुचि बढ़ी है, परंतु इस क्षेत्र में व्यवस्थित शोध अभी सीमित है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य भारतीय उपभोक्ताओं में लिनेन वस्त्रों के प्रति जागरूकता, प्राथमिकता एवं खरीद व्यवहार को समझना है। शोध में यह जानने का प्रयास किया गया है कि उपभोक्ता लिनेन के गुणों - जैसे आराम, जीवाणु-रोधी विशेषताएँ, पर्यावरणीय स्थिरता और दीर्घायु - के बारे में कितना जानते हैं, और ये जानकारियाँ उनके क्रय निर्णयों को किस हद तक प्रभावित करती हैं। इसके साथ ही, मूल्य संवेदनशीलता, सांस्कृतिक जुड़ाव, और पर्यावरणीय स्तर जागरूकता जैसे कारकों की भूमिका का भी विश्लेषण किया गया है। विभिन्न शोध अध्ययनों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि उपभोक्ता व्यवहार केवल उत्पाद की गुणवत्ता से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों, प्रतिष्ठित गुणवत्ता और व्यक्तिगत दृष्टिकोण से भी गहराई से जुड़ा होता है। यह अध्ययन नीति-निर्माताओं, व्यापारियों और वस्त्र उद्योग के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करता है ताकि भारत में लिनेन वस्त्रों की स्वीकार्यता और माँग को मजबूत किया जा सके।

Keywords लिनेन वस्त्र, उपभोक्ता जागरूकता, खरीद व्यवहार, टिकाऊ वस्त्र, भारतीय बाजार
Subject Area अर्थशास्त्र
Issue Volume 3, Issue 2 (April - June 2026)
Published 2026/06/25
How to Cite विवेक शर्मा एवं रक्षा सिंह (2026). भारत में लिनेन वस्त्रों के प्रति उपभोक्ताओं की जागरूकता, प्राथमिकता एवं खरीद व्यवहार का अध्ययन. Shodh Sangam Patrika, 3(2), 106–113.

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