| Paper Title |
भारत में महिला आरक्षण और राजनीतिक सहभागिता का बदलता स्वरूप: एक आलोचनात्मक मूल्यांकन |
| Author(s) | डॉ. अमित कुमार. |
| Country | India |
| Abstract |
महिला और पुरुष दोनों एक दूसरे के सम्पूरकता के पर्याय है और दोनों का जीवन सहजीविता का जीवंत प्रमाण भी है लेकिन पितृ सत्तात्मक सामाजिक संरचना के कारण महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व काफी नगण्य है। 73 वें एवं 74 वें संविधान संशोधन अधिनयम 1992 के माध्यम से भारत में महिला आरक्षण पहली बार लागू हुआ। इसके कारण कारण पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 46 % के करीब पहुंच चुकी है लेकिन संसद और विधानमंडल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी काफी कम है। लोकसभा में महिला प्रतिनिधित्व मात्र 13.6% है तो राज्यसभा में मात्र 12.6 % है। भारत सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनयम 2023 के माध्यम से लोकसभा एवं राज्य / केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभा में एक तिहाई सीट महिलाओं के लिए संवैधानिक रूप से आरक्षित किया गया है लेकिन अभी यह अधिनयम लागू नहीं हो सका है। महिला आरक्षण के समक्ष उप वर्गीकरण और परिसीमन की समस्या बनी हुई है। उम्मीद है इस अधिनियम के लागू होने से भारतीय लोकतंत्र में लैंगिक समानता और लैंगिक न्याय की स्थापना होगी । भारतीय लोकतंत्र ज्यादा समावेशी और समतामूलक होगा । नीति निर्माण और निर्णय निर्माण में महिलाओं की सहभागिता बढ़ेगी एवं भारतीय लोकतंत्र और मजबूत होगा |
| Keywords | पितृसत्तात्मक समाज, लैंगिक समानता, आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक न्याय, स्थानीय स्वशासन, नीति निर्माण, निर्णय-निर्माण, सकारात्मक कार्यवाही, प्रधान पति, लोक-कल्याणकारी राज्य। |
| Subject Area | राजनीति विज्ञान |
| Issue | Volume 3, Issue 2 (April - June 2026) |
| Published | 2026/06/25 |
| How to Cite | अमित कुमार (2026). भारत में महिला आरक्षण और राजनीतिक सहभागिता का बदलता स्वरूप: एक आलोचनात्मक मूल्यांकन. Shodh Sangam Patrika, 3(2), 114–127. |
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