| Paper Title |
हरियाणा के लोक नाट्य सांग में अभिनय की सहज़ता और माईज़नर अभिनय तकनीक:तुलनात्मक अध्ययन |
| Author(s) | विजय पाल. |
| Country | India |
| Abstract |
लोक नाट्य सांग हरियाणा के लोक जीवन की परंपराओं का अहम हिस्सा है। सांग के अभिनेता को सांगी कहा जाता है। सांगी गायन, संवाद और शारीरिक गतियों द्वारा लोक जीवन के कथानकों का कलात्मक प्रदर्शन करता है। साँगों का ताना-बाना विविन्न प्रकार के लोक गीतों से उपज़े कला-तन्तुओं से बुना हुआ है। साँग में यह रागिनी का जादू ही है, जो सिर चढ़कर बोलता है। एक हाथ कान पर रखकर और दूसरे को आकाश में उठाकर अभिनेता जब एक विशेष अन्दाज़ में अपनी रागिनी गाता है, तो समां बँध जाता है। सांगी अक्सर दर्शकों से जुड़ने के लिए हास्य व्यंग्य, गीत और अतिशयोक्तिपूर्ण हाव-भाव का उपयोग करता है, चुंकि सांगी क्षेत्र के सांस्कृतिक और सामाजिक ताने बाने में रमा होता है इसलिये इसके अभिनय में सहज़ गतिशीलता और तालमेल दिखाई देता है। यह सहज़ गतिशीलता और तालमेल दर्शक को भावनात्मक रूप से प्रदर्शन के साथ जोड़ देती है। वहीं दुसरी तरफ माईज़नर अभिनय तकनीक अभिनेता को पल में रखते हुए सच्ची भावनाओं को जीना सिखाती है। यह तकनीक अमेरिकी अभिनय प्रशिक्षक सेन्फोर्ड माईज़नर द्वारा विकसित की गई है इसका उदैश्य अभिनेता को सहज़ बनाना है ताकि अभिनेता दृश्य में दि गई काल्पनिक परिस्थितियों में सत्यता से व्यवहार कर सके जिससे दृश्य जीवन का हिस्सा लगे। यह तकनीक सैन्फोर्ड माईज़नर द्वारा लम्बे समय तक दिये गये अभिनय प्रशिक्षण के अनुभवों पर आधारित है। यह शोध पत्र उत्तर भारत में स्थित हरियाणा के लोक नाट्य सांग में अभिनय की सहज़ता और माईज़नर अभिनय तकनीक द्वारा अभिनेता को सहज़ बनाने की प्रक्रिया का तुलनात्मक अध्ययन है। |
| Subject Area | संगीत |
| Issue | Volume 3, Issue 2 (April - June 2026) |
| Published | 2026/05/23 |
| How to Cite | विजय पाल (2026). हरियाणा के लोक नाट्य सांग में अभिनय की सहज़ता और माईज़नर अभिनय तकनीक:तुलनात्मक अध्ययन. Shodh Sangam Patrika, 3(2), 32–36. |
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